कोरबा/कटघोरा: अटल प्रतिमा में अनियमितता पर पहली बड़ी कार्यवाही : उप अभियंता चंद्र प्रकाश जायसवाल निलंबित
स्वीकृत एस्टीमेट के विपरीत निर्माण, प्रतिमा की परत उखड़ने और तकनीकी मानकों पर खरी नहीं उतरने का मामला; जांच रिपोर्ट के बाद नगरीय प्रशासन विभाग का बड़ा एक्शन

कटघोरा/कोरबा। कटघोरा के अटल परिसर में भारतरत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की कांस्य प्रतिमा के निर्माण को लेकर उठे विवाद में आखिरकार सरकार ने बड़ी कार्रवाई कर दी है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने मामले की जांच के बाद उप अभियंता चंद्र प्रकाश जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालनालय ने शुक्रवार को निलंबन आदेश जारी किया। विभागीय जांच में प्रतिमा निर्माण को लेकर कई गंभीर तकनीकी अनियमितताएं सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है।
‘एस्टीमेट कुछ और, निर्माण कुछ और?’

जांच में सामने आया कि अटल प्रतिमा का निर्माण स्वीकृत प्राक्कलन यानी एस्टीमेट के प्रावधानों के विपरीत किया गया। यही नहीं, प्रतिमा के विभिन्न हिस्सों से परत उखड़ने और लगातार क्षतिग्रस्त होने जैसी कमियां भी जांच में दर्ज की गईं।कांस्य प्रतिमा के निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन हुआ या नहीं, इस पर भी गंभीर सवाल पाए गए। यानी जिस प्रतिमा को वर्षों तक अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति और सम्मान का प्रतीक बनकर खड़ा रहना था, उसके निर्माण की गुणवत्ता पर जांच रिपोर्ट ने ही सवाल खड़े कर दिए।
शिकायतें आईं, जांच हुई और खुल गई निर्माण की पोल

अटल परिसर की प्रतिमा को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि प्रतिमा का निर्माण निर्धारित गुणवत्ता और स्वीकृत मानकों के अनुरूप नहीं किया गया। इसके बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के बिलासपुर क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त संचालक के माध्यम से विस्तृत जांच कराई गई।
जांच के बाद प्रस्तुत रिपोर्ट में निर्माण कार्य से जुड़ी गंभीर कमियों और अनियमितताओं का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने जिम्मेदारी तय करते हुए उप अभियंता के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की।

गुणवत्ता नियंत्रण और तकनीकी निगरानी पर भी सवाल
जांच में सिर्फ निर्माण की गुणवत्ता ही सवालों के घेरे में नहीं आई, बल्कि गुणवत्ता नियंत्रण और तकनीकी पर्यवेक्षण में लापरवाही की बात भी सामने आई।
विभाग ने माना कि उप अभियंता द्वारा अपने पदीय दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं किया गया। इसके चलते न केवल सार्वजनिक धन से निर्मित कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए, बल्कि शासन की छवि भी प्रभावित हुई।
अब बड़ा सवाल—जिम्मेदारी सिर्फ उप अभियंता तक क्यों?
उप अभियंता के निलंबन के बाद अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या निर्माण की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ एक अधिकारी की थी?
यदि स्वीकृत एस्टीमेट के विपरीत निर्माण हुआ, तकनीकी मानकों का पालन नहीं हुआ और गुणवत्ता नियंत्रण में लापरवाही बरती गई, तो फिर ठेकेदार, निर्माण एजेंसी और निगरानी व्यवस्था में शामिल अन्य जिम्मेदारों की भूमिका की भी जांच होगी या नहीं?
अब लोगों की नजर इस बात पर है कि विभाग आगे जांच का दायरा बढ़ाता है या कार्रवाई निलंबन तक ही सीमित रहती है।
निलंबन के बाद भी खत्म नहीं हुआ विवाद
निलंबन आदेश के अनुसार, चंद्र प्रकाश जायसवाल का निलंबन अवधि में मुख्यालय संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय कार्यालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास, दुर्ग निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।लेकिन कार्रवाई के बाद भी अटल प्रतिमा का विवाद खत्म होता नजर नहीं आ रहा। क्योंकि अब सवाल केवल एक अधिकारी के निलंबन का नहीं, बल्कि सरकारी धन से निर्मित प्रतिमा की गुणवत्ता, निर्माण प्रक्रिया और पूरी जवाबदेही का है।









